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Friday, 30 June 2017

कमियाँ मेरी सब ने देखीं

कमियाँ मेरी सब ने देखीं
पर मेरे हुनर को किसी न पहचाना

शीरीं मंसूरी "तस्कीन "

Thursday, 29 June 2017

अपने प्यार के काबिल

न तुमने मुझे कभी पहचाना, न पहचानोगे
शायद मैं ही गलत थी जो तुम्हें
अपने प्यार के काबिल समझ बैठी

शीरीं मंसूरी  "तस्कीन"

Wednesday, 28 June 2017

मैं तुम्हें जितना भूलने की कोशिश करती हूँ

मैं तुम्हें जितना भूलने की कोशिश करती हूँ
तुम मुझे उतना ही याद आते हो
मुझे पता नहीं ये मेरी कमी है
या ये तुम्हारी कमी है
शायद ये तुम्हारी ही कमी है
कि तुम इतने अच्छे न होते
तो शायद मैं तुम्हें कभी याद न करती
तुम्हारे जैसा ढूढा भी बहुत मैंने
पर तुम तो सबसे अलग हो इस दुनियाँ में
तुम्हें ऊपर वाले ने अकेला बनाया है
तुम्हारे जैसा कोई हो भी नहीं सकता
क्योंकि तुम सबसे अच्छे हो
पता है तुहारी पहचान क्या है
अच्छाई ही तुम्हारी पहचान है

शीरीं मंसूरी “तस्कीन”

Tuesday, 27 June 2017

अल्लाह मुझे उस वक्त

अल्लाह मुझे उस वक्त
आप से बहुत शिकायत थी
जब मैं अपनी बेकार सी
 ख्वाहिशों के पीछे भाग रही थी
मुझे आपसे हजारों शिकायतें थीं
तब मैं दुनियाँ से बेखबर थी
जब दुनियाँ को देखा पहचाना
 कि दुनियाँ में सिर्फ और सिर्फ
मतलबी लोग ही रहा करते हैं
अपना मतलब निकल जाने के बाद
वो अपनों को पहचान ने से
इन्कार कर देते हैं
जब मुझे दुनियाँ समझ आयी
तो मुझे खुद से हजारों शिकायतें हैं
और आप से एक भी शिकायत नहीं
क्योंकि आपने मेरा हमेशा भला चाहा
आप से अच्छा तो मेरे लिए
कोई सोच भी नहीं सकता

शीरीं मंसूरी “तस्कीन”

Monday, 26 June 2017

वक़्त भी कितना अजीब है

वक़्त भी कितना अजीब है न
इन्सान को क्या कुछ नहीं सिखा देता
जब मुझे तुम्हारी ख्वाहिश थी
तब तुम्हें मेरी ख्वाहिश नहीं थी
जब मैं तुमसे बेपनाह प्यार करती थी
तब तुम्हें मुझसे प्यार नहीं था
उस वक़्त जब तुम मुझे छोड़कर जा रहे थे
अपनी खुशियों की दुनियाँ में
तब तुम्हें मेरे खोने का कोई गम नहीं था
मैंने तुम्हें लाख मनाया समझाया
पर तुमने मेरी एक न मानी
उस आखिरी वक़्त मैंने
तुमसे कहा था “ तुम पछताओगे “
वक्त वो दिन जल्द ही लाया
जब तुमने मुझसे कहा कि
आज तुम्हारी दुनिया में सब कुछ है
पर तुम खुश नहीं हो
शायद तुम्हें मेरे खोने का गम है
आज मेरी दुनियाँ में कुछ भी नहीं है
पर मैं तुम्हें खोने के बाद बहुत खुश हूँ
कल के दिन तुम्हें मेरा एहसास नहीं था
आज मुझे तेरा एहसास नहीं है
वक्त भी कितना अजीब है न

शीरीं मंसूरी “तस्कीन”

Friday, 23 June 2017

कई अर्सा हो गया

कई अर्सा हो गया
तुम्हारी मुस्कराहट देखे हुए
कई ......
तुम्हारा झूठा खाए हुए
कई ......
मेरी हर बात पे"हाँ ठीक है " किये हुए
ये सब सुनने के लिए
आज भी मेरा दिल बेक़रार है

शीरीं मंसूरी "तस्कीन"

Thursday, 22 June 2017

आखिरी दिन

साल का आखिरी दिन था
सब भूल के नयी जिन्दगी की ओर
बढ़ने लगी थी मैं
अचानक आकर यूँ मेरी जिन्दगी में
सब रंग भर गए थे तुम
सोचा था मंजिल मिल गई मुझे
अंजान थी में खुद से
 
जो तुझ पर भरोसा कर बैठी

शीरीं मंसूरी " तस्कीन "

Wednesday, 21 June 2017

बहुत दूर चला गया

गम आज मुझसे बहुत दूर चला गया
कहता है यहाँ बहुत अँधेरा है

शीरीं मंसूरी " तस्कीन "

Tuesday, 20 June 2017

लाख मुखोटे

अपने चहरे पे तुमने लगाये हैं
यूँ अच्छाई के लाख मुखोटे
ढूँढने निकलूँ बुराई को दुनिया में
तो तुम सा बुरा न कोई पायेगा

शीरीं मंसूरी " तस्कीन "

Monday, 19 June 2017

होसलों और उम्मीदों

मैं सागर की रेत, तुम सागर की लहर
मैं होंसलों और उम्मीदों से
सागर की रेत से घर बनाती हूँ

और तुम हमेशा की तरह
मेरे होसलों और उम्मीदों से बने घर को
हर बार की तरह तोड़ कर चले जाते हो


शीरीं “तस्कीन”

Sunday, 18 June 2017

ज़िन्दगी का सफ़र

ज़िन्दगी का सफ़र किसी ने न जाना 


मैं अंजानी तू बेगाना 

शीरीं मंसूरी 'तस्कीन'


Saturday, 17 June 2017

गलती तेरी नहीं

गलती तेरी नहीं मेरी थी जो
मेरी आँखें तेरा दिल न पढ़ पायीं

शीरीं मंसूरी 'तस्कीन'

Friday, 16 June 2017

वक़्त को और इंसान

वक़्त को और इंसान को बदलने में देर नहीं लगती .......
शीरीं मंसूरी 'तस्कीन'

16.05.17

Thursday, 15 June 2017

एक सच सभी के लिए

एक सच सभी के लिए
जब कोई अनजान व्यक्ति आपकी जिंदगी में अचानक से आता है और आप उस अनजान व्यक्ति को अपनी जिंदगी की सारी सच्चाई उसे आँख बंद करके बता देते हैं उसके ऊपर हद से ज्यादा भरोसा करने लगते हैं अक्सर वही व्यक्ति आपको सबसे ज्यादा तकलीफ पहुंचता है अक्सर लड़कियां ऐसा ज्यादातर करती हैं वो हर इंसान के ऊपर बहुत जल्दी भरोसा कर लेती हैं ऐसे व्यक्ति आपका बुरे वक़्त में साथ छोड़ कर चले जाते हैं धीरे धीरे आप उन पर बोझ बनने लगते हैं वो आपसे पीछा छुड़ाने के लिए लाख बहाने ढूँढने लगते हैं आपको ignore करने लगते हैं तभी आपको समझ जाना चाहिए की आपको उन्हें बिना बताये उनकी जिंदगी से बहुत दूर चले जाना चाहिए जहाँ दूर दूर तक उन्हें आपका कोई नामो निशाँ न मिले वो आपकी परछाई को भी न ढूंढ पाएं और अगर और आपको कुछ मानता होगा तो जरूर आपको ढूँढने की कोशिश करेगा जब तक आप उसकी जिंदगी से बहुत दूर जा चुके होंगे फिर उसे पछतावा होगा अगर वो आपको कुछ मानता होगा अगर उसने झूठा रिश्ता आपसे जोड़ा होगा तो वो शायद कभी नहीं पछतायेगा दोस्तों मेरी एक सलाह है ऐसे लोगो से दूरियां ही अच्छी क्यों की जिसे आपकी क़दर नहीं वहां कोई रिश्ता कायम नहीं।

शीरीं मंसूरी 'तस्कीन'

Wednesday, 14 June 2017

अर्शे के बाद

कई अर्शे के बाद उनका ये पयाम आया है
उन्हें आज भी है मुहब्बत ये पैगाम आया है

शीरीं मंसूरी 'तस्कीन'

Tuesday, 13 June 2017

माँ तू कितनी प्यारी है

माँ तू कितनी प्यारी है
आप जैसा कोई नहीं
मेरे रूठ जाने पर 
बार बार मनाती हो
मुझे हमेशा खुश करने की
कोशिशों में लगी रहती हो
मेरे छोटी-छोटी परेशानियों में

खुद परेशान हो जाती हो
मेरी मुसीबतों को अपने सर
मोल ले लेती हो माँ तुम
मेरी सारी गलतियों को 
पल भर में माफ़ कर देती तो
माँ तुम बहुत प्यारी हो, 
माँ तुम बहुत प्यारी हो..........

I really really love you mamma 
World ki best mammi i love you so much

शीरीं मंसूरी 'तस्कीन'

Monday, 12 June 2017

तुम जैसा कोई नहीं

ढूंढ़ने चली थी हर इंसान के अन्दर तुम्हें
न पता था तुम जैसा कोई नहीं इस जहाँ में

शीरीं मंसूरी 'तस्कीन'

Sunday, 11 June 2017

रास्ते में

दूर चले गए मुझे यूँ रास्ते में अकेला छोड़कर 
आज भी उसी मोड़ पर खड़ी तेरा इंतज़ार करती हूँ

शीरीं मंसूरी 'तस्कीन'

Saturday, 10 June 2017

सपना देखा था

सपना देखा था कभी हर पल को तेरे साथ बिताने का 
मगर वो सपना बंद अखियों में कैद हो के रह गया हमेशा के लिये

शीरीं मंसूरी 'तस्कीन'

Friday, 9 June 2017

तमाशा तक़दीर का

बदलना चाहती थी अपनी तक़दीर को 
पर देख तमाशा तक़दीर का मुझे ही बदल डाला

शीरीं मंसूरी 'तस्कीन'

Thursday, 8 June 2017

फ़िक्र करने वाला

आज परेशानी हुई तब जाना
मेरी फ़िक्र करने वाला कौन है
जिसे में पराया समझी 
आज वो मुझे अपनापन दे गया

शीरीं मंसूरी 'तस्कीन'

Wednesday, 7 June 2017

ऐ मेरे दोस्त

न भूली हूँ न भूलूँगी ऐ मेरे दोस्त
आज भी तुम मेरी सांसों में जिंदा हो

शीरीं मंसूरी 'तस्कीन'

Tuesday, 6 June 2017

कभी मिटते नहीं

कुछ जख़्म ऐसे मिलते हैं ज़िन्दगी में
जो कभी मिटते नहीं 
हमेशा दर्द देते हैं

शीरीं मंसूरी 'तस्कीन'

Monday, 5 June 2017

दुनियां की यारी

देखी दुनियां की यारी
बिछड़े सभी बारी बारी

शीरीं मंसूरी 'तस्कीन'

Sunday, 4 June 2017

कड़वे

सच्चे बोल कड़वे होते हैं 

शीरीं मंसूरी 'तस्कीन'


होने के बावजूद भी

आज सब कुछ होने के बावजूद भी
ज़िन्दगी में खालीपन सा महसूस हो रहा है शायद मेरे दोस्त मुझे तेरी कमी खल रही है
I really miss you dost

शीरीं मंसूरी 'तस्कीन'


Saturday, 3 June 2017

दूर जाना चाहता है

जब कोई आपको ignore करने लगे समझो वो आपसे दूर जाना चाहता है 

शीरीं मंसूरी 'तस्कीन'

Friday, 2 June 2017

ज़िन्दगी की कशमकस

ज़िन्दगी की कशमकस में ,उलझनें हैं हज़ार 
मगर मैं तुझे याद ,करती हूँ बार- बार ....

शीरीं मंसूरी  'तस्कीन' 

Thursday, 1 June 2017

ऐ मेरे हमदम .....

एक नई कोशिश की है... शायद इसे लेखन तो नहीं कहा जा सकता, आप चाहें तो कह भी सकते हैं... कुछ क़लम घिसी है ... क्या निकला ... खुद तय करना मुश्किल है.... आप बताइयेगा
निकल पड़ती हूँ हर रोज तुम्हारी तलाश में 
ऐ मेरे हमदम .....
ढूंढती हूँ हर इंसान के अन्दर तुझे 
ऐ मेरे हमदम .....
सूनी सड़कों में , सूनी गलियों में तुझे 
ऐ मेरे हमदम .....
हर दिन तेरा बेसब्री से इंतज़ार करती हूँ 
ऐ मेरे हमदम .....
कभी खुद गिरती हूँ , कभी खुद को संभालती हूँ 
ऐ मेरे हमदम .....
हर सुबह भोर के तारे के साथ ढूंढती हूँ तुझे 
ऐ मेरे हमदम .....
नई किरण के साथ नई उम्मीद के साथ ढूंढती हूँ तुझे 
ऐ मेरे हमदम .....
शीरीं मंसूरी 'तस्कीन'

Wednesday, 31 May 2017

कठपुतली बनकर जीना होता है

र एक दिन कठपुतली बनकर जीना होता है
दूसरों को ख़ुशी और खुद को दुःख देती हूँ
हर एक दिन झूठी मुस्कान के साथ दिन की शुरुआत करती हूँ
ये दुनियां वाले मेरे दिल के छुपे दर्द को क्या महसूस करेंगे

लोगों को हँसाना तो जानती हूँ पर अभी तक खुद हँसना नहीं सीख पाई
एक रोज अगर खुदा मिले तो पूछूंगी उस खुदा से
क्या वाक़ई एक औरत की ज़िन्दगी एक कठपुतली होती है ?
शायद खुदा का जवाब भी यही होगा जो दुनियां का है

कठपुतली तुझे इस दुनियां के जीते जागते लोगों ने बनाया है
मैंने तो तुझे दुनियां में इक औरत की खूबियों को गढ़कर भेजा था

मगर इन दुनियां के लोगों ने तुझे कठपुतली बनाया है 


शीरीं मंसूरी 'तस्कीन'

Tuesday, 30 May 2017

ज़िन्दगी की हकीक़त थी

कुछ ज़िन्दगी की हकीक़त थी
पर मैंने उसे स्वीकार नहीं किया
बचपन में मैं सोचती थी कि

ये  भेद भाव के रस्मो रिवाज कुछ नहीं होते
दिन बीतते गए सच सामने आता गया
फिर भी मैं जानकर अंजान रही

सच सामने था पर हमेशा की तरह उसे नकारती रही
पर सच से मैं कब तक पीछे भागती
उसे तो एक न एक दिन सामने आना था

फिर एक दिन खुद अपनी लड़की होने की इस कमी को स्वीकारा
जब सब मेरे साथ मेरी आँखों के सामने हुआ
लोगों ने सच ही कहा है कि लड़कियां पराया धन होती हैं

अपनी जान को निछावर करने के बाद भी
उन्हें हमेशा यही सुनने को मिलता है

कि लड़कियां पराया धन हैं पराया धन 


शीरीं मंसूरी 'तस्कीन'